1273 बसे डीटीसी के बेड़े से हटा दी गई- हारुन यूसूफ

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय माकन की आम आदमी पार्टी की पोल खोल अभियान के तहत होने वाली प्रेसवार्ता की कड़ी की में आज दूसरे दिन कांग्रेस की दिल्ली सरकार में परिवहन मंत्री रहे श्री हारुन यूसूफ ने पिछले 3 वर्षों में दिल्ली में बिगडी़ परिवहन व्यवस्था पर प्रेसवार्ता की और बताया कि किस प्रकार केजरीवाल सरकार ने परिवहन व्यवस्था में और सुधार करने की बजाए कांग्रेस द्वारा स्थापित परिवहन व्यवस्था को कैसे बर्बाद किया है और परिवहन व्यवस्था को लेकर उनके किए गए वायदे किस प्रकार झूठे साबित हुए है। संवाददाता सम्मेलन में श्री हारुन यूसूफ के साथ प्रदेश प्रवक्ता पूजा बाहरी, वरिष्ठ नेता श्री चत्तर सिंह, दिल्ली प्रोफेश्नल कांग्रेस के अध्यक्ष अमन पंवार, दिल्ली कांग्रेस के लीगल एवं मानव अधिकार विभाग के चैयरमेन एडवोकेट सुनील कुमार, मुख्य मीडिया कॉआर्डिनेटर मेहदी माजिद कॉओर्डिनेटर शिवम भगत मौजूद थे।प्रदेश कार्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए श्री हारुन यूसूफ ने कहा कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार एक असंवैदनशील सरकार है जिसने तीन वर्षों में दिल्ली को 70 वर्ष पुरानी बना दिया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली की बहुत ज्यादा आबादी डीटीसी बसों का इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए करती है, और आज डीटीसी आई.सी.यू. में है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल यानि 2013-14 में जहां डीटीसी के बेड़े में 5223 बसे थी, वे अगस्त 2017 में घटकर 3951 रह गई अर्थात 1273 बसे डीटीसी के बेड़े से हटा दी गई। उन्होंने कहा कि दिल्ली देहात में चलने वाली स्टेडंर्ड फ्लोर बसों में 173 बसों की कमी आई है। इसी प्रकार कांग्रेस के कार्यकाल 2013-14 में डीटीसी से यात्रा करने वाले लोगों की संख्या तकरीबन 159 करोड़ थी जो कि 2015-16 में कम होकर 129 करोड़ रह गई और औसतन 8.88 प्रतिशत प्रतिवर्ष दर की कमी हो रही है।

श्री हारुन यूसूफ ने कहा कि मेट्रो किराया वृद्धि पर केजरीवाल द्वारा की गई राजनीति को उजागर करते हुए कहा कि एक ही वर्ष में उन्होंने 2 बार किराए में बढ़ौत्तरी की जबकि कांग्रेस के पूरे कार्यकाल में केवल 2 बार किराया बढ़ाया गया। किराया बढ़ौत्तरी के कारण जहां मई 2017 में मेट्रो से 26.5 लाख यात्री प्रतिदिन यात्रा करते थे वह अक्टूबर 2017 में घटकर 25.7 लाख प्रतिदिन रह गई अर्थात 0.8 लाख यात्री प्रतिदिन कम हुए। श्री हारुन यूसूफ ने मेट्रो किराया की वृद्धि को लेकर आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार और भाजपा की केन्द्र सरकार द्वारा छीटाकशी की राजनीति पर व्यंग कसते हुए कहा कि बड़ी अजीब बात है कि मेट्रो की फेयर फिक्शेसन कमेटी में दोनो सरकारों ने किराया बढ़ौत्तरी का फैसला लिया और फिर इस मुद्दे पर राजनीति की। श्री यूसूफ ने कहा कि आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार नई बसें न खरीदने के लिए पार्किंग की जगह न होने का बहाना बनाती है। ज्ञात हो कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री अजय माकन ने दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की हुई है जिसमें यह कहा गया है कि दिल्ली सरकार मल्टी लेवल बस पार्किंग की व्यवस्था पहले से स्थापित बस डिपों में करे, जो किफायती और सुगम होगा क्योंकि यह बात सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्थापित EPCA Environment Pollution (Prevention & Control Authority) ने अपनी रिपोर्ट में कहा था। श्री यूसूफ ने कहा कि जहां एक ओर डीटीसी की बेड़े में बसे कम हुई है वहीं दूसरी ओर आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार की लापरवाही के कारण मेट्रो फेस -3 तकरीबन 2 वर्ष पीछे चल रहा है, जिसके कारण मेट्रो फेस-3 के काम की लागत भी बड़ी है। उन्होंने कहा कि मेट्रो फेस-3 को 9.8.2013 को मंजूरी मिल गई थी तथा सितम्बर 2016 तक पूरा होना था जो केवल 22 किलोमीटर ही बन पाया। मेट्रो फेस-4 जिसके कारण दिल्ली के लोगों को काफी सहूलियत मिलनी थी उसका अभी तक कोई अता-पता नही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेरठ हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी बनाया जाना था परंतु दिल्ली सरकार ने उसको जानबूझ कर रोका हुआ है।

श्री हारुन यूसूफ ने कहा कि आप पार्टी की दिल्ली सरकार का दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को लेकर निकम्मापन इससे जाहिर होता है कि उनको जो पैसा परिवहन व्यवस्था के सुधार के लिए दिया गया था वह भी डीटीसी पर खर्च नही कर पाए। श्री यूसूफ ने कहा कि JNNURM  के तहत आप पार्टी की दिल्ली सरकार को 205 करोड़ का फंड मिलना था जो कि इनकी लापरवाही से नही मिल सका। दिल्ली सरकार ने Environment Compensation Charge के तहत 829 करोड़ रुपया माल ढ़ोने वाले वाहनों से एकत्रित किया जिसमें से केवल 93 करोड़ रुपया ही खर्च किया जा सका। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार इसके तहत एकत्रित की जाने वाली राशि को सड़कों, सार्वजनिक परिवहन तथा साईकिल ट्रेक बनाने के लिए खर्च किया जाना था। इसी प्रकार निर्भया फंड में से 140 करोड़ रुपया जो कि डीटीसी तथा कलस्टर बसों में सीसीटीवी कैमरों के लिए दिल्ली सरकार को मिलना था वह नही मिल सका क्योंकि आप पार्टी की दिल्ली सरकार के ढुलमुल रवैये के कारण गृहमंत्रालय ने उनके प्रोपोज़ल को ठुकरा दिया था। श्री हारुन यूसूफ ने आम आदमी पार्टी द्वारा 2015 के दिल्ली के चुनाव घोषणा पत्र में दिल्ली की परिवहन व्यवस्था को सुधारने के लिए किए गए वायदों पर बोलते हुए कहा कि उन्होंने अपने वायदे खुद ही पूरे नही किए। उन्होंने कहा कि आप पार्टी ने यह कहा था कि एक यूनाईफाईड ट्रांसपोर्ट अथारिटी बनाऐंगे जिसके तहत मेट्रो, बस, ऑटो रिक्शा, रिक्शा तथा साईकिल को लेकर होलिस्टिक ट्रांसपोर्ट पॉलिसी बनेगी परंतु ऐसा कुछ नही हुआ। उन्होंने कहा कि आप पार्टी ने दिल्ली में ऑटो स्टेंड , ऑटो रिक्शा की खरीद को दुरस्त करके उसमें ब्लैक मार्केटिंग को रोकना तथा ऑटो वालों को लेकर पुलिस जादतियों को रोकना था। उन्होंने कहा कि न तो एक भी नया ऑटो स्टेन्ड बना है और रही बात ऑटो परमिट की तो 10 हजार ऑटो परमिट के आवंटन में उनका घोटाला पाया गया। आज भी ऑटो परमिट को लेकर ऑटो फाइंनेंस माफिया काम कर रहा है और ऑटो ड्राईवर आए दिन पुलिस के द्वारा परेशान किए जाते है। श्री हारुन यूसूफ ने कहा कि उन्होंने ऑटो के किराए में मंहगाई के अनुसार प्रतिवर्ष दो बार की वृद्धि की बात कही थी तथा मीटर में वेटिंग शुल्क का भी वायदा किया था। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी को 3 वर्ष हो चुके है परंतु एक बार भी ऑटो किराए में वृद्धि नही हुई है। आम आदमी पार्टी ने धारा66/192ए के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए वायदा किया था परंतु ऐसा कुछ नही हुआ और आज भी ऑटो वालों पर परिवहन विभाग की मनमानी चलती है।

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